
प्रो. एम. पुष्पावती
निदेशक, अखिल भारतीय वाक् एवं श्रवण संस्थान
निदेशक के बारे में
प्राध्यापक एम. पुष्पावती ने अखिल भारतीय वाक् श्रवण संस्थान, मानसागंगोत्री, मैसूरु से स्नातक [बी.एससी (वाक् एवं श्रवण)], स्नातकोत्तर [एम.एससी (वाक् एवं श्रवण)], एवं पीएच.डी. (वाक् एवं श्रवण) की डिग्री पूरी की।
उन्हें स्नातक, स्नातकोत्तर एवं डॉक्टरेट छात्रों को पढ़ाने का 22 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वह वाक् भाषा दोष विज्ञान में प्राध्यापक एवं वर्तमान में निदेशक हैं। उनकी विशेष रुचि के क्षेत्रों में वाक् दोष, विशेष रूप से मुख-चेहरे संबंधी विसंगतियों एवं आवाज दोष से संबंधित वाक् दोष शामिल हैं। उन्होंने 75 मास्टर्स एवं 8 डॉक्टरेट छात्रों को उनके शोध प्रबंध एवं थीसिस के लिए मार्गदर्शन दिया है। वह भारत के कई विश्वविद्यालयों के अध्ययन बोर्ड एवं परीक्षक बोर्ड की सदस्य रही हैं। उन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में 75 वैज्ञानिक पत्र प्रकाशित किए हैं। उनके पास विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, आईएमपीआरआईएनटी एवं भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद द्वारा वित्त पोषित कई बाह्य परियोजनाएं थीं। उन्होंने आईश रिसर्च फंड द्वारा वित्त पोषित 10 परियोजनाएं भी पूरी की हैं। वह भारतीय वाक् एवं श्रवण एसोसिएशन तथा भारतीय क्लेफ्ट लिप, पैलेट एवं क्रेनियोफेशियल एनोमलीज सोसायटी की आजीवन सदस्य हैं। वह कई पत्रिकाओं की समीक्षक हैं। उन्होंने अखिल भारतीय वाक् श्रवण संस्थान, मैसूरु में नैदानिक सेवाएं, वाक् भाषा दोष विज्ञान, संचार दोष वाले व्यक्तियों के लिए टेली-सेंटर और विशेष शिक्षा विभागों का नेतृत्व किया है। उन्होंने दो वर्षों तक संस्थान के शैक्षणिक समन्वयक, मुंबई केंद्र के लिए डीएचएलएस समन्वयक, संपदा अधिकारी, आईश जिमखाना के उपाध्यक्ष और संरचनात्मक ऑरोफेशियल विसंगतियों (यूएसओएफए) के लिए इकाई के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया था।
वह एकॉस्टिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया द्वारा स्थापित प्रतिष्ठित प्राध्यापक रईस अहमद मेमोरियल पुरस्कार की प्राप्तकर्ता हैं।
प्राध्यापक एम. पुष्पावती ने 17 अक्टूबर 2018 को अखिल भारतीय वाक् श्रवण संस्थान, मैसूरु के निदेशक का पदभार संभाला। उन्होंने डॉ. एस.आर. सावित्री का स्थान लिया।












